बंगाल की खाड़ी में फिर से निम्न दबाव का क्षेत्र बनने का असर 1-2 दिन में दिखने लगेगा, जिसके चलते न सिर्फ बंगाल और ओडिशा बल्कि बिहार और झारखंड में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इसका खासा असर दिखेगा. इसी के मद्देनजर दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं.
अल नीनो के खतरे के बाजवूद भारत में मानसूनी सीजन के 3 महीने ठीक गुजरे. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक इस दौरान सामान्य से 14 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है, लेकिन मौसम विभाग इसे सामान्य बारिश ही मानता है. इस साल कई दशकों के सबसे खौफनाक अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है और भारत में भी इसका असर भी दिखना शुरू हो गया है.
नॉर्थ ईस्ट में 26 फीसदी कम बारिश
IMD के मुताबिक देश के 56 फीसदी भू भाग पर सामान्य बारिश हुई है, जबकि 44 फीसदी हिस्से में बारिश कम हुई है. अगर देश के 4 हिस्सों में बारिश की स्थिति देखें तो नॉर्थ ईस्ट में 26 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई. देश के पूर्वोत्तर में सामान्य बारिश का रिकॉर्ड ज्यादा है, इसी वजह से कम बारिश होने के बावजूद वहां जितनी बारिश हुई, वो देश के बाकी हिस्सों से ज्यादा ही है. हालांकि मध्य भारत में इस बार अच्छी बारिश हुई है.
Extremely heavy rainfall observed at isolated places over East Uttar Pradesh.
— India Meteorological Department (@Indiametdept) August 30, 2026
Very heavy rainfall over Jharkhand, East Madhya Pradesh, Chhattisgarh and Odisha.
Heavy rainfall over Bihar, Gangetic West Bengal, Uttarakhand, West Uttar Pradesh and Konkan & Goa during 0830 hrs IST of… pic.twitter.com/liGRnIPi7T
सितंबर में मानसून फिर से एक्टिव
मौसम विभाग ने बताया कि अगस्त के आखिरी दिनों में कमजोर पड़ा मानसून सितंबर की शुरुआत में फिर से एक्टिव होता दिख रहा है. मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक आज पश्चिम बंगाल और झारखंड के मैदानी इलाकों में कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. 1 सितंबर तक ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बारिश का असर देखने को मिलेगा.
एक ही राज्य में बारिश और सूखा
सितंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली, पूर्वी हरियाणा, पूर्वी पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है. हालांकि देश के पश्चिमी हिस्सों को बहुत ज्यादा राहत मिलने की संभावना नहीं है. पश्चिमी पंजाब, पश्चिमी हरियाणा, पश्चिमी और मध्य राजस्थान के अलावा गुजरात के बड़े हिस्सों में मुख्य रूप से शुष्क मौसम रह सकता है. इन क्षेत्रों में पहले से बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात बने हुए हैं और सितंबर की शुरुआत में भी स्थिति में ज्यादा सुधार की संभावना नहीं है.
अल नीनो
प्रशांत महासागर के गर्म होने से पैदा होने वाली जलवायु स्थिति को अल नीनो कहा जाता है, जिससे भारत में मानसून के कमजोर होने की आशंका बढ़ती है. 2023 में अल नीनो के बावजूद पूरे जून-सितंबर मानसून की बारिश सामान्य से केवल 5.3 फीसदी कम रही थी. इस साल के लिए भी सामान्य स्थिति का अनुमान लगाया था. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के मुताबिक ये पिछले 7 दशकों में सबसे ताकतवर अल नीनो होगा. सितंबर तक सुपर अल नीनो का प्रभाव शुरू होने के बाद इस साल के अंत तक ये अपने चरम पर होगा.
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