उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली वाली जगह पर शुद्धिकरण मामले को लेकर अब नया बवाल देखने को मिल रहा है. इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद सोमवार को कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला. कांग्रेस ने पूछा कि धामी सरकार इस शुद्धिकरण रस्म के खिलाफ मामला दर्ज करने से क्यों बच रही है. विपक्षी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से इसका मुंहतोड़ जवाब देगी.
राहुल गांधी पर FIR को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा ने कहा, "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद 'शुद्धिकरण' रस्म करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उस जातिवादी हरकत के खिलाफ आवाज उठाने वाले विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज की गई. क्या यही BJP सरकार का न्याय है?"
राहुल जी के खिलाफ FIR को मुद्दा बनाना छोड़िए।
— Pawan Khera 🇮🇳 ಪವನ್ ಖೇರಾ (@Pawankhera) August 31, 2026
जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ बीजेपी ने देश भर में 40-50 केस करा दिए हैं, उनके ख़िलाफ़ एक और FIR हो भी गई तो कौनसा आसमान सर पर टूट पड़ा?
असली मुद्दा राहुल जी के ख़िलाफ़ हुआ FIR नहीं है। असली मुद्दा ‘शुद्धिकरण’ का है।
बीजेपी और उत्तराखंड…
क्या बोले पवन खेड़ा
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, "राहुल जी के खिलाफ FIR को मुद्दा बनाना छोड़िए. जिस व्यक्ति के ख़िलाफ़ बीजेपी ने देश भर में 40-50 केस करा दिए हैं, उनके ख़िलाफ़ एक और FIR हो भी गई तो कौनसा आसमान सर पर टूट पड़ा? असली मुद्दा राहुल जी के ख़िलाफ़ हुई FIR नहीं है. असली मुद्दा ‘शुद्धिकरण’ का है."
'उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है कि FIR करे'
पवन खेड़ा ने कहा कि बीजेपी और उत्तराखंड सरकार की नीयत देखिए. जिस व्यक्ति ने शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई, उनके खिलाफ तो तुरंत FIR कर दी लेकिन जिन लोगों ने शुद्धिकरण किया और करवाया, उनके ख़िलाफ़ अब तक एक FIR तक नहीं हुई. उन्होंने आगे कहा कि खरगे जी ने संसद में खड़े होकर कहा कि शुद्धिकरण हुआ है. उत्तराखंड सरकार की जिम्मेदारी है कि FIR करे. बाकी क्या हुआ, किसने किया, क्यों किया वो छानबीन में सामने आ ही जाएगा.
धामी सरकार पर निशाना साधते हुए पवन खेड़ा ने कहा कि फिर FIR दर्ज करने से इतना डर क्यों? आखिर बीजेपी और उत्तराखंड सरकार शुद्धिकरण के ख़िलाफ़ FIR से कतरा क्यों रही है? क्या उनकी दलित गरिमा और न्याय सुनिश्चित करने की कोई मंशा ही नहीं है?
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