राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में हिंदू-मुस्लिम को लेकर बयान दिया था. इसको लेकर विपक्ष ने उनकी आलोचना की. वहीं मुस्लिम नेताओं की तरफ से मिलाजुला रिएक्शन सामने आया है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भागवत पर निशाना साधा है. वहीं दूसरी ओर इमाम उमर अहमद इलियासी ने भागवत की तारीफ की और कहा कि वे उनके बयान से सहमत हैं.
ओवैसी ने कहा, 'यह आरएसएस की पुरानी चाल है. कुछ बातें दुनिया के लिए होती हैं और कुछ उसके अपने सदस्यों के लिए. आरएसएस ने अपने प्रमुख विचारकों और लेखकों के विचारों से कभी खुद को अलग नहीं किया है. वे मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों के बारे में क्या कहते हैं?'
ओवैसी ने आरोप लगाया कि आरएसएस लोकतंत्र का विरोध करता है और लगातार तानाशाही की मांग करता रहा है. उन्होंने कहा, 'आरएसएस के लिए भारतीय मुसलमान और ईसाई नंबर एक और नंबर दो के ‘आंतरिक खतरे’ हैं.'
इलियासी ने भागवत का किया समर्थन
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के चीफ इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा, 'मैं मोहन भागवत के बयान का समर्थन करता हूं और उनसे सहमत हूं. मेरा मानना है कि भारत भी इससे सहमत है. उन्होंने हमेशा एकता की बात की है, चाहे वह मुसलमानों के बारे में हो या दूसरे धर्मों के लोगों के बारे में.'
इलियासी ने कहा, 'उन्होंने कहा कि सभी का DNA एक ही है. उनका अमेरिका में दिया बयान ऐतिहासिक होगा और एक मील का पत्थर साबित हो सकता है. जैसे अमेरिका में स्वामी विवेकानंद के शब्दों को आज भी याद किया जाता है, वैसे ही मोहन भागवत का मैसेज भी एक मील का पत्थर बन सकता है.'
मौलाना अरशद मदनी ने क्या दी प्रतिक्रिया
मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के एक गुट के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने सवाल किया कि अगर ऐसा है तो आरएसएस ऐसे लोगों को बाहर क्यों नहीं करता. मदनी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा, 'अमेरिका में एकता, भाईचारे और सभी धर्मों के सम्मान की बात करना सराहनीय है, लेकिन आज इस संदेश की वास्तविक जरूरत भारत में है.'
उन्होंने कहा, 'ये लोग आखिर कौन हैं जो मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ नफरत फैलाते हैं, भीड़ द्वारा हत्या और हिंसा का समर्थन करते हैं, आर्थिक व सामाजिक बहिष्कार की अपील करते हैं, मस्जिदों, मदरसों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाते हैं और मुसलमानों की नागरिकता तथा संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाते हैं?'
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