घाटी में कानूनी ज्यूरिडिक्शन के विस्तार को लेकर गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बड़ा फैसला किया है. केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की बेंच को लद्दाख में स्थापित करने का फैसला किया है. इसकी जानकारी गृहमंत्री अमित शाह ने साझा की है. उन्होंने बताया कि सरकार ने लद्दाख में कोर्ट की पीठ को स्थापित करने का फैसला किया है.
गृहमंत्री शाह ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र जी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लद्दाख में जम्मू कश्मीर की हाईकोर्ट की एक बेंच स्थापित करने का फैसला लिया है.'
उन्होंने बताया, 'इससे लद्दाख के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले नागरिकों के लिए एक न्याय तक पहुंच काफी बेहतर होगी. क्योंकि उन्हें मिलने वाली कानूनी सेवाओं के लिए लगने वाला समय कम हो जाएगा. सरकार लद्दाख के सर्वागीण विकास और संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.'
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The Union Cabinet, under the leadership of the PM Shri @narendramodi Ji, has decided to set up a bench of the High Court of Jammu and Kashmir in Ladakh. This will significantly enhance access to justice for citizens living in remote areas of Ladakh by reducing the time required…
— Amit Shah (@AmitShah) August 20, 2026
जानें जम्मू कश्मीर की हाईकोर्ट का इतिहास
हाईकोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, जम्मू कश्मीर राज्य के लिए पूरी तरह से काम करने वाला हाईकोर्ट साल 1928 में बनाया गया था. इससे पहले राज्य के शासक यानी महाराजा ही न्याय करने के मामले में आखिरी अधिकारी होते थे. 1889 में ब्रिटिश सरकार ने राज्य के तत्कालीन शासक महाराजा प्रताप सिंह से एक काउंसिल बनाने का कहा था. काउंसिल के न्यायिक सदस्य के पास दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों में अपील सुनने की सभी शक्तियां थी. राज्य में दो प्रांत थे. जम्मू और कश्मीर.
वहां मुख्य न्यायाधीश न्यायिक अधिकार का इस्तेमाल करते थे. वे काउंसिल के कानूनी सदस्य की देखरेख और कंट्रोल करते थे. बाद में इस काउंसिल को खत्म कर दियागया. शासक ने न्यायिक मामलों का फैसला करने के लिए हाईकोर्ट के न्यायाधीश के तौर पर एक मंत्री को नियुक्त किया. इसके बाद 1927 में राज्य के तत्कालीन शासक ने एक नया संविधान मंजूर किया. कानूनी सदस्य की जगह न्याय विभाग में मंत्रालय स्थापित किया. इसके बाद 26 मार्च 1928 को आदेश संख्या 1 के तहत हाईकोर्ट की स्थापना हुई. महाराजा ने लाल कंवर सेन को कोर्टा पहला मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया था.
1954 में संविधान आवेदन आदेश 1954 के जरिए सुप्रीम कोर्ट का अधिकार क्षेत्र जम्मू कश्मीर राज्य तक बढ़ाया गया. हाईकोर्ट को पहली बार मौलिक अधिकार लागू करने के लिए रिट जारी करने की शक्ति दी गई. 1957 में जम्मू कश्मीर संविधान अधिनियम के जरिए एक स्वतंत्र न्यायिक निकाय बना. हाईकोर्ट की मंजूर जजों की संख्या 25 है. यहां मई से अक्टूबर के अंत तक चीफ जस्टिस और हाईकोर्ट का प्रसासनिक विंग श्रीनगर में काम करता है. नवंबर से अप्रैल तक मुख्यालय जम्मू में रहता है.
