India

अब लद्दाख में महकेगी केसर की सुगंध, पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सुखद, 30 दिनों में खिले फूल

N
ABP News
November 2, 2026•3 min read
अब लद्दाख में महकेगी केसर की सुगंध, पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सुखद, 30 दिनों में खिले फूल

लद्दाख के अधिक ऊंचाई वाले कृषि क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए केसर की खेती की प्रायोगिक परियोजना ने लद्दाख के ठंडे और शुष्क रेगिस्तानी इलाके के लिए उत्साहजनक नतीजे दिए हैं. लेह में हाल ही में बहाल की गई खराब हो चुकी जमीन पर शुरू की गई इस पायलट परियोजना में अब फूल खिलने लगे हैं.

इस अच्छी खबर को साझा करते हुए लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने केसर के खेत का दौरा किया और पहली बार खिले फूलों को देखा. उन्होंने कहा कि केसर के खेत में फूल खिलने की प्रक्रिया रिकॉर्ड 30 दिनों में पूरी हो गई, जबकि आमतौर पर इसमें दो महीने का समय लगता है.

परियोजना से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

परियोजना से जुड़े कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि अभी यहां रोजाना औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं और सोमवार (2 नवंबर) को सुबह ही 72 फूल खिले. इस तेज और अच्छी वृद्धि के कारण केवल चार दिनों में लगभग 22 ग्राम शुद्ध केसर इकट्ठा किया जा सका है.

एक महत्वाकांक्षी प्रयोग के तौर पर, 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' के तहत लगभग 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर ईरान की बेहतरीन किस्म के केसर के लगभग 800 किलोग्राम कॉर्म (लगभग 90,000 नग) लगाए गए थे. यह जमीन पहले बंजर थी, जिसे हाल ही में फिर से उपजाऊ बनाया गया है. पौधरोपण 1 अक्टूबर को किया गया था और 30 दिनों से भी कम समय में इसमें फूल खिलने लगे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित है पहल

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन से प्रेरित है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कृषि पद्धतियों में विविधता लाकर किसानों और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है. लद्दाख में केसर की खेती, प्रशासन की तरफ से उच्च मूल्य वाले फूलों की खेती (फ्लोरिकल्चर) के सफल प्रयोगों को आगे बढ़ाती है. इससे पहले लेह में लिलीयम और ग्लैडियोलस की बड़े पैमाने पर खेती की गई थी, जिससे किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर खुले हैं.

यह उपलब्धि स्थानीय पर्यावरण की मजबूती का बड़ा सबूत- उपराज्यपाल

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा, ‘यह उल्लेखनीय उपलब्धि स्थानीय पर्यावरण की मजबूती का एक बड़ा प्रमाण है और यह दिखाती है कि लद्दाख जैसे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खेती की अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिनका अभी तक पूरा इस्तेमाल नहीं हुआ है.’

उन्होंने कहा, ‘इस पायलट परियोजना की सफलता भविष्य में बड़े पैमाने पर केसर के व्यावसायिक उत्पादन के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है. इससे लद्दाख में फसल की खेती और कृषि-आधारित उद्यमिता के लिए मुनाफे वाले नए रास्ते खुलेंगे, जिससे एक मजबूत, समृद्ध और आत्मनिर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था की नींव पड़ेगी.’

लद्दाख में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की जा रही केसर की खेती

गौरतलब है कि केसर एक बहुत कीमती फसल है, जिसकी बाजार में भारी मांग है और अच्छी कीमत मिलती है. इससे किसानों को कमाई का एक अतिरिक्त और लाभदायक जरिया मिल सकता है. भारत में केसर की खेती मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में होती है, जहां देश के कुल उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पैदा होता है.

इसलिए लद्दाख में इसे एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है, ताकि यह देखा जा सके कि यहां की जलवायु इसके लिए कितनी उपयुक्त है और इससे आर्थिक रूप से कितना फायदा हो सकता है. उपराज्यपाल ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कृषि विभाग के अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की भी तारीफ की. उन्होंने इस पायलट प्रोजेक्ट को बेहद सफल बनाने में उनके अहम योगदान, विशेषज्ञता और लगन की सराहना की.

यह भी पढ़ेंः ‘दिल्ली पुलिस क्यों प्रोटेस्ट कर रही है, क्या ये पब्लिक के लिए...’, CJP का निशाना

Topics & Tags:#India
अब लद्दाख में महकेगी केसर की सुगंध, पायलट प्रोजेक्ट के नतीजे सुखद, 30 दिनों में खिले फूल | BharatSay.com