महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने सोमवार (2 नवंबर) को सीबीआई की अर्जी मंजूर करते हुए उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ ले जाने की अनुमति दे दी. अब CBI आरोपी को रायपुर की विशेष अदालत में पेश करेगी. अदालत ने निर्देश दिया कि सौरभ चंद्राकर को बुधवार (4 नवंबर) या उससे पहले रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाए.
अदालत के आदेश के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर को 1 नवंबर 2026 को शाम 7:35 बजे गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उसे दिल्ली की रॉउज एवेन्यू कोर्ट में पेश कर रायपुर ले जाने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी गई थी. आरोपी को ओमान से भारत लाया गया है. उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ में दर्ज मामले की जांच अब CBI कर रही है.
महादेव बुक ऐप के जरिए सट्टेबाजी चलाने का आरोप
CBI के मुताबिक, महादेव बुक ऐप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और उनके अन्य सहयोगियों ने बढ़ावा दिया था. जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार चलाया जाता था. इसके लिए अलग-अलग पैनल और शाखाएं बनाई गई थीं, जो सट्टेबाजी से जुड़े काम संभालती थीं.
अदालत के आदेश में दर्ज आरोपों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए अवैध सट्टेबाजी से कमाई की जाती थी. कथित तौर पर इस पैसे को कई बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजा जाता था और फिर विदेशों में ट्रांसफर किया जाता था. जांच एजेंसी का यह भी आरोप है कि महादेव बुक ऐप का संचालन दुबई से किया जा रहा था और छत्तीसगढ़ के कई युवाओं को कर्मचारी या मैनेजर के रूप में काम पर रखा गया था.
मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी और भ्रष्टाचार से जुड़े कानूनों के तहत जांच की जा रही है. हालांकि, ये सभी आरोप हैं और इन पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई के बाद होगा.
छत्तीसगढ़ पुलिस से CBI को सौंपी गई थी जांच
अदालत के आदेश के अनुसार, इस मामले में CBI ने 18 दिसंबर, 2024 को केस दर्ज किया था. इससे पहले रायपुर के स्टेट इकोनॉमिक ऑफेंस ब्यूरो में FIR दर्ज की गई थी. केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की अधिसूचनाओं के बाद मामले की जांच CBI को सौंप दी गई.
आदेश में यह भी कहा गया कि सौरभ चंद्राकर के खिलाफ रायपुर की विशेष CBI अदालत से 9 सितंबर, 2026 को गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था. वह इस मामले में चार्जशीट का सामना कर रहा है.
ओमान से भारत लाने के बाद दिल्ली में पेशी
अदालत में सुनवाई के दौरान CBI ने बताया कि आरोपी को रायपुर की विशेष अदालत में पेश करना जरूरी है. जांच एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद कानूनी समयसीमा के भीतर आरोपी को संबंधित अदालत में पेश करने के लिए ट्रांजिट रिमांड लेना जरूरी था.
सौरभ चंद्राकर के वकील ने सुनवाई के दौरान ओमान की अदालत के आदेश का हवाला दिया. बचाव पक्ष ने दलील दी कि भारत की ओर से प्रत्यर्पण के लिए भेजे गए अनुरोध और ओमान में स्वीकार किए गए अनुरोध के बीच अंतर है.
वकील के मुताबिक, ओमान में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मामले में प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार किया गया था, जबकि CBI के मामले को लेकर कानूनी सवाल मौजूद हैं. बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि प्रत्यर्पण से जुड़ी शर्तों के तहत आरोपी पर उन्हीं अपराधों के लिए मुकदमा चलाया जा सकता है, जिनके संबंध में प्रत्यर्पण की अनुमति दी गई हो. इसी आधार पर CBI की कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई.
CBI ने रॉउज एवन्यू कोर्ट क्या दी दलील?
CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपी के खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी है. जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि ओमान की अदालत के आदेश की जो प्रति बचाव पक्ष ने पेश की है, वह प्रमाणित या आधिकारिक प्रति नहीं है.
CBI का कहना था कि आरोपी को निर्धारित समयसीमा के भीतर रायपुर की सक्षम अदालत में पेश करना आवश्यक है. एजेंसी ने यह भी दलील दी कि प्रत्यर्पण से संबंधित कानूनी सवालों पर अंतिम निर्णय संबंधित स्पेशल कोर्ट को करना चाहिए.
दलीलें सुनकर रॉउज एवेन्यू कोर्ट ने क्या कहा?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली की अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके सामने फिलहाल केवल ट्रांजिट रिमांड का सवाल है. प्रत्यर्पण की शर्तें, आरोपी पर मुकदमा चलाने और अन्य कानूनी आपत्तियों पर अंतिम फैसला करना इस अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. अदालत ने कहा कि इन मुद्दों पर रायपुर की विशेष अदालत विचार कर सकती है. इसके बाद कोर्ट ने CBI की अर्जी स्वीकार करते हुए सौरभ चंद्राकर को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले जाने की अनुमति दे दी.
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