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Screen Sharing Scam क्या है, एक कॉल से कैसे हो जाता है UPI Fraud?

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ABP News
August 31, 20263 min read
Screen Sharing Scam क्या है, एक कॉल से कैसे हो जाता है UPI Fraud?

पिछले कुछ समय में स्क्रीन शेयरिंग स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिनमें एक फोन कॉल पर लोग अपनी पूरी जिंदगी की कमाई गंवा बैठे हैं. यह फ्रॉड इतनी चालाकी से किया जाता है कि पढ़े-लिखे और टेक्नोलॉजी समझने वाले लोग भी इसका शिकार बन जाते हैं. आइए समझते हैं कि आखिर यह स्कैम काम कैसे करता है और सिर्फ एक कॉल से कैसे बैंक अकाउंट खाली हो जाता है.

कैसे शुरू होता है स्कैम?

आमतौर पर स्कैमर्स किसी बैंक, कस्टमर केयर, बीमा कंपनी या किसी शॉपिंग ऐप के कर्मचारी बनकर कॉल करते हैं. कई बार यह कॉल किसी फर्जी कस्टमर केयर नंबर पर की गई सर्च से भी शुरू होता है, जो गूगल पर असली नंबर जैसा दिखता है. स्कैमर्स कॉल पर भरोसा दिलाने के लिए बैंकिंग जैसी भाषा और शब्दावली का इस्तेमाल करते हैं, जिससे सामने वाले को शक नहीं होता.

कई मामलों में स्कैमर्स रिफंड, कैशबैक, केवाईसी अपडेट या किसी फर्जी सब्सक्रिप्शन चार्ज को वापस दिलाने के बहाने कॉल करते हैं. जैसे ही व्यक्ति को लगता है कि उसके पैसे वापस मिलने वाले हैं या कोई परेशानी दूर होने वाली है, वह स्कैमर की हर बात मानने लगता है.

स्क्रीन शेयरिंग ऐप की एंट्री

असली खेल यहीं से शुरू होता है। स्कैमर व्यक्ति को AnyDesk, TeamViewer या Quick Support जैसी कोई स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने को कहता है. यह कहा जाता है कि समस्या ठीक करने या रिफंड प्रोसेस करने के लिए स्क्रीन शेयर करना जरूरी है. ये ऐप्स असल में ऑफिस मीटिंग या टेक्निकल सपोर्ट के लिए बनाई गई हैं, लेकिन स्कैमर्स इनका गलत इस्तेमाल करते हैं. जैसे ही ऐप डाउनलोड होकर एक कोड जनरेट होता है और व्यक्ति वह कोड स्कैमर को बता देता है, स्कैमर को उस फोन की पूरी स्क्रीन दिखनी शुरू हो जाती है.

UPI पिन और OTP बनते हैं हथियार

स्क्रीन शेयर होने के बाद स्कैमर व्यक्ति से कहता है कि रिफंड पाने के लिए एक छोटी-सी UPI रिक्वेस्ट अप्रूव करनी है या किसी ऐप में एक फॉर्म भरना है. असल में यह रिक्वेस्ट पैसे वापस लेने की नहीं, बल्कि पैसे भेजने की होती है. चूंकि व्यक्ति की स्क्रीन पहले से ही स्कैमर को दिख रही होती है, इसलिए जैसे ही वह UPI पिन डालता है, स्कैमर वह पिन भी लाइव देख लेता है.

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कुछ ही सेकंड में खाली हो जाता है अकाउंट

एक बार UPI पिन या OTP स्कैमर के पास पहुंच जाए, तो वह चंद सेकंड में एक के बाद एक कई ट्रांजैक्शन करके अकाउंट से पैसे निकाल लेता है. चूंकि स्क्रीन शेयरिंग एक्टिव रहती है, इसलिए स्कैमर को यह भी पता होता है कि अकाउंट में कितनी रकम बची है और कहां-कहां से पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं. ज्यादातर मामलों में पीड़ित को तब तक कुछ समझ नहीं आता, जब तक बैंक से पैसे कटने के मैसेज नहीं आने लगते.

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