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Electric Diya For Diwali: पानी डालते ही कैसे जलते हैं इलेक्ट्रिक दीये? जानें इसके पीछे की टेक्नोलॉजी

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ABP News
November 2, 2026•4 min read
Electric Diya For Diwali: पानी डालते ही कैसे जलते हैं इलेक्ट्रिक दीये? जानें इसके पीछे की टेक्नोलॉजी

Electric Diya For Diwali: दिवाली के त्योहार पर हर घर में आपको कई दीये जलते हुए नजर आते हैं. इनमें कोई घी डालता है तो कई तेल के दीये जलाता है. रौशनी के इस त्योहार में दीयों का काफी महत्व है. लेकिन जैसे-जैसे हर चीज समय के साथ हाईटेक होती जा रही है दिवाली के दीये भी हाईटेक हो गए हैं. अब बाजार में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ-साथ पानी से जलने वाले इलेक्ट्रिक दीये मिल रहे हैं. देखने में ये बिल्कुल नार्मल दीयों जैसे ही लगते हैं.

लेकिन इनमें न तो तेल डालना होता है और न ही रूई की बाती लगाने की जरूरत पड़ती है. इतना ही नहीं इ दीयो में कोई ऑन-ऑफ का बटन भी नहीं होता. बल्कि जैसे ही आप इनमें एक चम्मच पानी डालते हैं यह अपने आप जगमगाने लगते हैं. हर किसी के मन में यह सवाल जरूर आता है कि जहां पानी से इलेक्ट्रॉनिक चीजें खराब हो जाती हैं. वहां यह दीये पानी से जलते कैसे हैं. चलिए आपको बताते हैं इन दीयों के पीछे कौनसी टेक्नोलॉजी काम करती है.

इलेक्ट्रिक दीये किस तकनीक पर करते हैं काम?

पानी से जलने वाले इस छोटे से दीये के अंदर कोई बहुत बड़ी मशीन नहीं बल्कि एक बेहद स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक सर्किट काम करता है. अगर आप इस दीये को ऊपर से ध्यान से देखेंगे तो इसके बीच में एक छोटी सी एलईडी लाइट और उसके ठीक बगल में दो छोटे-छोटे मेटल के पॉइंट्स यानी पिन नजर आएंगे. इन दोनों पिनों को इलेक्ट्रोड या वॉटर सेंसर कहा जाता है.

वहीं दीये के निचले हिस्से में घड़ी में लगने वाले छोटे बटन सेल की एक बैटरी छुपी होती है. नार्मल स्थिति में जब दीया सूखा होता है तो बैटरी का एक तार तो एलईडी बल्ब से जुड़ा होता है. लेकिन दूसरा तार उन दोनों मेटल पिनों के बीच खाली जगह होने की वजह से अधूरा यानी ओपन सर्किट रहता है. जब तक दोनों पिनों का आपस में कोई संपर्क नहीं होता तब तक बैटरी से निकलने वाला करंट बल्ब तक नहीं पहुंच पाता और दीया बंद रहता है.


पानी की बूंद गिरते ही कैसे जल जाता है?

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हमारे घरों में आने वाले पानी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम जैसे कई प्राकृतिक मिनरल्स और सूक्ष्म तत्व घुले होते हैं जिन्हें आयन्स कहा जाता है. जैसे ही आप दीये के अंदर थोड़ा सा पानी डालते हैं वह पानी उन दोनों मेटल पिनों को आपस में डुबो देता है. पानी के अंदर मौजूद यह मिनरल्स दोनों पिनों के बीच एक पुल का काम करने लगते हैं.

हालांकि सिर्फ पानी से बहुत हल्का करंट ही पास हो पाता है इसलिए दीये के अंदर एक छोटा सा ट्रांजिस्टर भी लगा होता है. यह ट्रांजिस्टर पानी से मिलने वाले हल्के से सिग्नल को पकड़ता है और तुरंत मेन स्विच की तरह काम करते हुए बैटरी की पूरी पावर को एलईडी बल्ब में भेज देता है. इसी वजह से पानी डालते ही सर्किट पूरा हो जाता है और दीया जल उठता है.


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इस्तेमाल से जुड़ी कुछ जरूरी बातें

अब सवाल आता है कि क्या इस दीये में कोई भी पानी डाला जा सकता है. अगर आप इसमें बैटरी में डलने वाला डिस्टिल्ड वॉटर या बहुत ज्यादा फिल्टर किया हुआ RO का पानी डालेंगे, तो हो सकता है कि यह दीया न जले या बहुत मद्धम जले. क्योंकि साफ किए गए पानी में मिनरल्स खत्म हो जाते है जिससे करंट पास नहीं हो पाता. अगर कभी ऐसा हो तो पानी में एक चुटकी नमक मिला देने से यह तुरंत काम करने लगेगा.

इन दीयों में एलईडी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है जो न के बराबर बिजली खर्च करती है. इसके अंदर लगे तीन छोटे बटन सेल लगातार 40 से 50 घंटे तक का बैकअप आराम से दे देते हैं. जब आपको दीया बंद करना हो तो बस इसका पानी गिराकर इसे सूखे कपड़े से पोंछ दें, सर्किट टूटते ही लाइट बंद हो जाएगी. बैटरी खत्म होने पर आप इसके नीचे का ढक्कन खोलकर आसानी से नए सेल भी डाल सकते हैं.

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